कम्प्यूटर क्या होता है – What is Computer in Hindi – कंप्यूटर का इतिहास

कंप्यूटर जिसे हम व्यक्ति के जीवन की एक महत्वपूर्ण मशीन कह सकते है, यदि कंप्यूटर आज नहीं होता तब साइंस इतना आगे नहीं होता, कंप्यूटर के आज की दुनिया को आगे बढ़ाने में बहुत महत्त्व है, किसी भी ऑफीस का काम हो या दैनिक काम सभी कंप्यूटर पर ही आधारित होते है। यदि आप नहीं जानते की कंप्यूटर क्या है, कंप्यूटर की परिभाषा क्या है और कंप्यूटर इतिहास एवं कंप्यूटर से संबंधित जानकारियां तब आप इस लेख के माध्यम से सभी सवालों का जवाब आपको मिल जाएगा।

कम्प्यूटर क्या है ?

कम्प्यूटर क्या होता है - What is Computer in Hindi - कंप्यूटर का इतिहास

Computer शब्द अंग्रेजी के शब्द “compute ” से बना है,  जिसका मतलब होता है गणना करना, इसी कारण कंप्यूटर को हिंदी में गणक, अभिकलक यंत्र और संगणक भी कहा जाता है। जब कंप्यूटर का आविष्कार  शुरुआत में सिर्फ़ calculation करने के लिए ही हुआ था। इसी कारण कंप्यूटर को आप  calculation  या गणना करने वाला यंत्र भी बोल सकते हैं। लेकिन आज के समय में कंप्यूटर में गणना के अलावा अनेकों कार्य किए जाते हैं जैसे – अकाउंट का कार्य, वेबसाइट डिजाइनिंग,  टेंप्लेट और बैनर डिजाइनिंग, हिसाब- किताब, स्प्रेडशीट कार्य और सॉफ्टवेयर निर्माण जैसे अनेको कार्य किए जातें हैं।

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कंप्यूटर का इतिहास

कंप्यूटर का इतिहास कितना पुराना है इस बात कि यदि गहराई में जाए तो हमें पता चलता है कि कंप्यूटर का इतिहास 3000 साल पुराना है। दुनिया का सबसे पुराना कंप्यूटर अबेकस है जो आज से 3000 साल पहले चीन के वैज्ञानिकों ने बनाया था। इस कंप्यूटर की बनावट ऐसी थी कि इसमें एक आयताकार फ्रेम में लोहे की छड़ों में कई लकड़ी गोलियां लगी होती थी और उन गोलियों को ऊपर -नीचे खिसका कर गणना करनी पड़ती थी।

लेकिन इसमें एक खासियत यह थी कि यह बिना बिजली के चलने वाला संगणक यानि की कंप्यूटर था, जो सबसे पहले चीन में बना था। उसके बाद 1642 में निर्माण किया गया पास्कलाइन का जिसे गणित के महान जानकार ब्लेज पास्कल ने बनाया था।  ब्लेज पास्कल के नाम से ही इस कंप्यूटर का नाम पास्कलाइन पड़ा। इस कंप्यूटर की खासियत थी कि इसमें अबेकस के मुकाबले ज्यादा गणना करना संभव था और साथ ही यह सबसे पहला मैकेनिकल कंप्यूटर था।

आखिरकार सन 1822 में बना कंप्यूटर डिफरेंज इंजन।  डिफरेंज इंजन का आविष्कार किया था चार्ल्स बैबेज ने। यह कंप्यूटर पहले के दो कंप्यूटरों से काफी ज्यादा अलग था क्योंकि इसमें गणना करना काफी सटीक होता था। डिफरेंज इंजन नाम के इस कंप्यूटर में  पंच कार्ड का इस्तेमाल किया जाता था। इसी आधार पर यह कहना गलत नहीं होगा कि जो आधुनिक कंप्यूटर है उसके जनक चार्ल्स बैबेज हैं।

कम्प्यूटर का पूरा नाम क्या है 

क्या आप Computer Full Form in Hindi & English जानते है, यदि नहीं तब नीचे की जानकारी से पा सकते है, बैसे तो कंप्यूटर का पूरा नाम कंप्यूटर ही रखा गया था, लेकिन अब इसकी फुल फॉर्म भी निकाल दी गई है जिसे जानना आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है।

Computer Full Form : 

C – Commonly
O – Operating
M – Machine
P – Particularly
U – Used in
T – Technology
E – Education and
R – Research

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कम्प्यूटर की विशेषताए

कंप्यूटर की सबसे पहली विशेषता यह है कि यह सबसे तेज गति से सही व 100% सटीक गणना करने में सक्षम है। जितना ज्यादा काम कोई कर्मचारी साल भर में कर सकता है उतना काम एक कंप्यूटर 1 दिन में करने की क्षमता रखता है। कंप्यूटर की स्पीड को HZ यानी कि नैनो सेकंड में मापा जाता है। कंप्यूटर 10-9 नैनो सेकंड तक की गणना कर सकता है।

इसके अलावा कंप्यूटर की दूसरी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह हजारों फाइलों को अपने अंदर स्टोर करके रख सकता है इसके साथ ही डाटा और अनेकों प्रकार की फाइलों को भी स्टोर करके रखता है। कंप्यूटर में विशाल असीमित भंडारण क्षमता होती है।कंप्यूटर की बाह्य क्षमता को extrnel memory और आंतरिक क्षमता को internal memory कहते हैं।

आप कंप्यूटर के हार्ड डिस्क व मेमोरी कार्ड में असीमित डाटा संग्रहित करके रख सकते हैं। इसके अलावा कंप्यूटर की एक सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी गणनाए 100%  त्रुटिरहित होती हैं। कंप्यूटर की सबसे बड़ी विशेषता है कि इसमें आप गणना के साथ अनेकों प्रकार के काम कर सकते हैं जैसे डिजाइनिंग, टाइपिंग, एनीमेशन,  वेबसाइट डेवलपिंग व कोडिंग का काम कर सकते हैं।

कंप्यूटर आपके डाटा की सुरक्षा की एक प्रकार से गारंटी लेता है क्योंकि यहां अगर आप अपने डाटा को पासवर्ड लगा कर गोपनीय रखते हैं तो कंप्यूटर भी आपके डाटा को किसी और के हाथ नहीं लगने देता। इसके अलावा कंप्यूटर अच्छे परिणाम देने में सक्षम है इसमें लगातार काम करने पर भी ये आपको लगातार एक जैसे परिणाम देते रहेगा।

कंप्यूटर की संरचना

Computer की संरचना की बात करें तो कंप्यूटर पांच भागों से मिलकर बनता है जिसमें आउटपुट, इनपुट, मेमोरी, प्रोसेसर, प्रोग्राम ये सभी आते हैं। कंप्यूटर के भाग प्रोसेसर को आप अगर असली कंप्यूटर कहे तो गलत नहीं होगा।  प्रोसेसर ही कंप्यूटर की संरचना का वह भाग है जो की मुख्य मशीन है और जिसका साथ अन्य चार भाग देतें हैं। प्रोसेसर एक प्रकार से कंप्यूटर का दिमाग है जो किसी व्यक्ति द्वारा दिए गए आदेश का सही प्रकार से पालन करता है। प्रोसेसर को सी. पी. यू.(central processing unit )भी कहते हैं।

Computer की संरचना में अगला भाग इनपुट है। सीपीयू के भी 3 भाग होते हैं -मैमोरी, एल. एल. यू, मेमोरी कंप्यूटर की भीतरी मेमोरी इंटरनल  मेमोरी होती है। एल.एल.यू (Arethmetic logic unit )में सभी प्रकार की गणनाए की जाती है।

कंप्यूटर की संरचनाओं में अगला भाग मेमोरी है, मेमोरी जैसा कि नाम से ही स्पष्ट होता है इसमें डाटा स्टोर करके रखा जाता है जिस प्रकार आप फोन का डाटा अपने मेमोरी कार्ड में स्टोर करके रखते हैं ठीक उसी प्रकार यह भी काम करता है। किसी कंप्यूटर की मेमोरी का आकार उसकी बाइट से नापा जाता है।

Computer की मेमोरी जितनी शक्तिशाली होगी उतना ही कंप्यूटर भी शक्तिशाली होगा।। कंप्यूटर की मेमोरी भी दो प्रकार के होते हैं जिससे भीतरी मेमोरी और बाहरी मेमोरी कहते हैं। कंप्यूटर की मेमोरी को RAM (Random access memory) और ROM (Read Only Memory)कहा जाता है ।

कंप्यूटर का अगला भाग है इनपुट। इनपुट कंप्यूटर का एक ऐसा भाग है जिसके द्वारा अपना डाटा प्रोग्राम कंप्यूटर को दिया जाता है। इनपुट में कंप्यूटर का कीबोर्ड( keyboard) ,माउस(mouse ),माइक(mic), लाइट पेन(light pen ), माइक स्केनर(mic scanner ),जॉय स्टिक (joy stick) आते हैं। आउटपुट कंप्यूटर का वह भाग होता है जिसमें हमें उत्तर(आदेश )प्राप्त होता है। आउटपुट में कई प्रकार के साधन होते हैं जैसे मॉनिटर(Monitor(,  प्रिंटर(printer), प्लॉटर(plotter), स्पीकर(Speaker)।

अब बात करते हैं प्रोग्राम की! प्रोग्राम जोकि आदेशों के समूह होते हैं। कंप्यूटर के जरिए जितने भी कार्य कराए जाते हैं वह सभी कार्य प्रोग्राम द्वारा कराए जाते हैं। आप यूं समझ लीजिए अगर कंप्यूटर में प्रोग्राम ना हो तो कंप्यूटर सिर्फ मशीन है ऐसी मशीन जो किसी काम की नहीं है।

कंप्यूटर के प्रकार

आकार और सुविधाओं के आधार पर कंप्यूटर तीन प्रकार के होते हैं।  मिनी कंप्यूटर, मेनफ्रेम कंप्यूटर और माइक्रो कंप्यूटर।
बात यदि मेनफ्रेम कंप्यूटर की करें तो यह कंप्यूटर आकार में बहुत बड़े होते हैं और बहुत सारी जगह भी घेरते हैं और इनकी कीमत भी बहुत ज्यादा होती है।

आजकल आपको ऐसे कंप्यूटर बहुत कम देखने को मिलते हैं। मिनी कंप्यूटर जिनका आकार मुख्य कंप्यूटर से छोटा होता है। मिनी कंप्यूटर ज्यादा कार्य क्षमता वाले होते है। इनका निर्माण ऐसी कंपनियों के लिए किया जाता है जिनके पास काम ज्यादा होता है। मिनी कंप्यूटर जैसे नाम से ही स्पष्ट होता है कि यह कम जगह घेरते हैं और किसी छोटे से कमरे में भी आसानी से एडजस्ट हो जाते हैं।

आज के समय में मिनी कंप्यूटर की संख्या मुख्य कंप्यूटर के मुकाबले कई गुना ज्यादा है। माइक्रो कंप्यूटर 1980 में आए । 1980 के बाद मुख्य कंप्यूटर के बड़े आकार के कारण ही माइक्रो कंप्यूटर का निर्माण किया गया। माइक्रो कंप्यूटर तो आकार में थोड़ा छोटे होते हैं लेकिन उनकी कार्य क्षमता काफी ज्यादा होती है।

माइक्रो कंप्यूटर मिनी कंप्यूटर से भी छोटे होते हैं और इनकी कीमत की बात करें तो मिनी कंप्यूटर के मुकाबले इनकी कीमत भी काफी कम होती है। p.c. माइक्रो कंप्यूटर का ही एक रूप है जिसे personal computer कहा जाता है। इन सभी कंप्यूटर के अलावा एक कंप्यूटर और है जिसे सुपर कंप्यूटर कहां जाता है।  इसकी गति अन्य सभी कंप्यूटर से काफी ज्यादा तेज होती है। भारत का एक अपना सुपरकंप्यूटर है जिसका नाम ‘परम‘ है ।

कंप्यूटर के कार्य

कंप्यूटर वैसे तो सैकड़ों व्यक्तियों का काम अकेले ही कर देता है। कंप्यूटर अनेकों प्रकार के कार्य करता है जिनमें 4 मुख्य प्राथमिक कार्य है –

1. डाटा इनपुट (data input )
2. डाटा आउटपुट (data output )
3. डाटा स्टोर (data store )
4. डाटा संसाधन (data processing)

  1. डाटा आउटपुट (data output )- डाटा आउटपुट का अर्थ है आप जो भी डाटा कंप्यूटर को देंगे वह इसके अंदर जाएगा उदाहरण के लिए जैसे- मैंने कीबोर्ड पर टाइप किया ‘Aryan’ ऐसे में Aryan इनपुट है जो मैंने कंप्यूटर को दिया है।
  2. डाटा आउटपुट (data output )- डाटा आउटपुट का मतलब कंप्यूटर को दिए गए इनपुट का परिणाम है उदाहरण के लिए मैंने कीबोर्ड पर टाइप किया ‘Aryan’ मेरे कीबोर्ड पर आर्यन टाइप करते ही मुझे स्क्रीन पर दिखाई दिया ‘Aryan ‘यानी कि आउटपुट।
  3. स्टोरेज (Data storage )- जिस प्रकार  आप गाने, पीडीएफ फाइल और वीडियोस को अपने मोबाइल फोन के इंटरनल और एक्सटर्नल मैमोरी में स्टोर करके रखते हैं ठीक उसी प्रकार कंप्यूटर में भी डाटा स्टोर करके रखा जाता है। कंप्यूटर में डाटा इंटरनल और एक्सटर्नल मैमोरी में स्टोर करके रखा जाता है। कंप्यूटर में RAM (Random access memory) और ROM (Read Only Memory) होती है।
  4. डाटा संसाधन (Data processing)- कंप्यूटर को दिए गए डाटा का परिणाम में आगे बढ़ना Data processing कहलाता है जिस प्रकार हम यूट्यूब पर कोई वीडियो देख रहे हैं वीडियो के आगे बढ़ने को डाटा प्रोसेसिंग कहा जाएगा।

कंप्यूटर की सीमाएं 

इंसानों पर निर्भर – कंप्यूटर की खुद की सोचने की क्षमता नहीं होती क्योंकि उसके पास खुद का दिमाग नहीं होता है। कंप्यूटर एक मशीन है जिसे इंसानों द्वारा संचालित किया जाता है। कंप्यूटर को चलाने के लिए एक यूजर की जरूरत होती है क्योंकि कंप्यूटर तो मशीन है और वह बुद्धिहीन भी है इसीलिए यूज़र द्वारा दिए गए डाटा व आदेश पर काम करने के लिए उसे संचालित किया जाता है।

विद्युत चलित – कंप्यूटर को चलाने के लिए बिजली खर्च होती है। जब बिजली ना हो तो कंप्यूटर को नहीं चलाया जा सकता। इसीलिए कंप्यूटर पर कार्य करने के लिए बिजली पर निर्भर रहना पड़ता है। हालांकि आज के समय में लैपटॉप में  बैटरी तो होती है लेकिन उसे भी बिजली के द्वारा ही चार्ज किया जाता है।

अधिक खर्चीला- कंप्यूटर एक अधिक खर्चीली मशीन है क्योंकि इसमें मौजूद हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर को बार-बार बदलना पड़ता है जो कि काफी महंगे होते हैं।

वायरस से खतरा – कई बार कंप्यूटर सही तरह से काम नहीं करता क्योंकि इसमें वायरस का खतरा हो जाता है। कंप्यूटर में बार-बार वायरस के आ जाने से कंप्यूटर की कार्य प्रणाली पर इसका असर पड़ता है जिससे कंप्यूटर सही से काम नहीं कर पाता। कई बार तो वायरस के प्रभाव से कंप्यूटर पूरी तरह खराब भी हो जाता है।

निष्कर्ष : 

आशा करते है, प्रिय पाठको की आपको कम्प्यूटर क्या होता है – What is Computer in Hindi यह जानकारी बेहद पसंद आएगी, अगर आपका इस लेख से संबंधित कोई भी सवाल या कंप्यूटर से जुडी और भी जानकारी प्राप्त करना हो तो हमें Comment Box में अवश्य बताये या फीडबैक दे सकते है। यदि आपको यह लेख पसदं आया तब अपने मित्रों के साथ अवश्य शेयर करे हमें खुसी होगी।

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